संस्थान का टाइम कैप्सूल
संस्थान का टाइम कैप्सूल
1840-1849
1842 : सोलानी नदी के तट पर एक गाँव था सोलानी
1842 : गंग नहर का निर्माण शुरू हुआ
1845 : बेयर्ड स्मिथ के मार्गदर्शन में सहारनपुर में प्रशिक्षण विद्यालय शुरू किया गया
1847-1947 : यह महाविद्यालय थॉमसन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के रूप में ही चलता रहा
1847-1852 : पहले प्राचार्य आर. मैकलागन के पहले कार्यकाल की अवधि
23 सितंबर 1847 : सर जेम्स थॉमसन ने एक अभियांत्रिकी महाविद्यालय का प्रस्ताव रखा
25 नवंबर 1847 : पहली बार महाविद्यालय की नियमावली जारी की गई
1 जनवरी 1848 : रुड़की कॉलेज ने कार्य करना शुरू कर दिया
25 नवंबर 1847 : नॉर्थ वेस्टर्न प्रॉविंस सरकार की ओर से रुड़की में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना के संबंध में अधिसूचना
1850-1859
29 अगस्त 1851 : रुड़की कॉलेज के विस्तार की योजना गवर्नर जनरल के समक्ष प्रस्तुत की गई 1852 : परिसर
21 सितंबर 1853 : नॉर्थ वेस्टर्न प्रॉविंस सरकार के लेफ्टिनेंट क
7 नवंबर 1853 : बंगाल सैपर्स ऐंड माइनर्स रुड़की
1855 : सेंट्रल इंस्ट्रूमेंट्स डिपो की स्थापना
1857 : कॉलेज में प्रवेश के लिए परीक्षा की शुरुआत
1860-1869
1860 : ईसीएस विलियम्स प्राचार्य के रूप में कार्य करने लगे
1861 : रुड़की नगरपालिका का गठन
1863 : प्राचार्य के रूप में जेजी मेडले की नियुक्ति
1863 : प्राचार्य मेडले द्वारा भारतीय अभियांत्रिकी पर प्रोफेशनल पेपर शुरू किए गए
1864 : रुड़की कॉलेज को कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया
1869 : भारत में सेवाएँ देने के लिए जानपद अभियंताओं के प्रशिक्षण हेतु इंग्लैंड में कूपर्स हिल कॉलेज खोला गया
1870-1879
1870 : कॉलेज के कैलेंडर का प्रकाशन शुरू हुआ
1871 : प्राचार्य के रूप में एएम लैंग की नियुक्ति, जि
1871 : अभियांत्रिकी विद्यार्थियों के लिए विधिवत भोजना
1872 : परिसर में फुटबॉल शुरू हुआ
1872 : परिसर में पोलो शुरू हुआ
1873 : परिसर में हॉकी का खेल भी शुरू हो गया
1873 : परिसर में वार्षिक आयोजन के रूप में ऐनुअल एथलेटिक मीट का आरंभ
1875 : कूपर्स हिल कॉलेज का नाम बदलकर रॉयल इंडियन इंजीनियरिंग कॉलेज कर दिया गया
1875 : शुल्क संरचना में बदलाव
1877 : कई टेनिस कोर्ट बनाए गए
1878 : सत्र की अवधि नवंबर-अगस्त से बदलकर मई-मार्च कर दी गई
1878 : कॉलेज का सैन्य अनुभाग औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया
1879 : भारत सरकार ने इंग्लैंड में कूपर्स हिल कॉलेज को बंद करने का प्रस्ताव रखा
1879 : लोअर सबॉर्डिनेट ग्रुप को विभाजित कर ग्रुप ए और ग्रुप बी का नाम दिया गया
1880-1889
1880 : अभियांत्रिकी विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम संशोधित
1880 : व्यायामशाला स्थापित
1882 : अस्थायी तौर पर ऐनुअल एथलेटिक मीट बंद कर दिया गया
1883: भूविज्ञान और प्रायोगिक विज्ञान के प्रोफेसर के पद को समाप्त कर दिया गया
1883 : सहायक अभियंता परीक्षाएँ स्थगित
1883 : प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना न्यूनीकृत
1886 : प्रोफेशनल पेपर का प्रकाशन समाप्त
1886: भारतीय इंजीनियरिंग पर प्रोफेशनल पेपर के प्रकाशन पर रोक
1889 : भारतीय छात्रों द्वारा टेनिस क्लब की स्थापना
1890-1899
1890 : परिसर में एक खेल के रूप में तरणताल की शुरुआत
1891 : बैंडर्थ ने प्रभार छोड़ा
1891 : एफडीएम ब्राउन ने प्राचार्य के रूप में प्रभार संभाला
1892 : कॉलेज द्वारा राजस्व अधिकारियों के लिए लघु पाठ्यक्रम शुरू किया गया
1893 : टेलीग्राफी इंजीनियरिंग का कोर्स शुरू किया
1894 : रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध
1894: ऑर्किड हाउस बनाया गया
1896 : लेफ्टिनेंट कर्नल सर एपी मैक्डॉनेल कॉलेज को पुनर्संयोजित एवं इसके विस्तार संबंधी योजनाओं के निरीक्षण के लिए परिसर भ्रमण हेतु आए
1896 : नेपाल के सर बीर शमशेर जंग बहादुर से उपहार में मिली घड़ी को गुंबद पर लगाया गया
1896 : विद्युत एवं यांत्रिक प्रशिक्षुओं के लिए कक्षाएँ शुरू की गईं
1897 : सहायक प्राचार्य के दो पद समाप्त कर दिए गए
1897 : विद्युत अभियांत्रिकी के अनुदेशक के रूप में एफ डब्ल्यू सिडविक ने कार्यभार ग्रहण किया
1897 : जानपद एवं विद्युत अनुशासन के साथ-साथ अभियांत्रिकी के पाठ्यक्रमों को दो वर्ष से विस्तारित कर तीन वर्ष का कर दिया गया
1898 : कॉलेज में बिजली की व्यवस्था हुई
1899 : डब्ल्यूडी मैक्लारेन ने यांत्रिक अभियांत्रिकी के एक अनुदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया
1900-1909
1901 : पाक्षिक परीक्षणों की जगह पर सत्रांत परीक्षाएँ शुरू कर दी गईं
1902 : रुड़की कॉलेज ने यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में लगातार 6 बार हॉकी शील्ड जीता
1905 : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्धता समाप्त
1907 : रॉयल इंडियन इंजीनियरिंग कॉलेज बंद कर दिया गया
1909 : कॉलेज में विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया
1909 : जानपद अभियांत्रिकी की समकक्षता में ही विद्युत एवं यांत्रिक अभियांत्रिकी के पाठ्यक्रम शुरू कर दिए गए
1909 : रासायनिक, भौतिक, यांत्रिक एवं खनिज प्रयोगशालाएँ, प्रकाशयांत्रिक विभाग, विद्युत अधिष्ठान एवं विद्युत प्रकाश का उद्घाटन हुआ
1910-1919
1910 : टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम शुरू हुआ
1912 : रुड़की कॉलेज से निम्न स्तर की सभी तकनीकी कक्षाएँ हटा दी गईं
1913 : थॉमसन कॉलेज के पुराने लड़कों का एक संगठन बनाया गया और उसे थॉमसन कॉलेज इंजीनियरिंग एसोसिएशन कहा गया
20-दिसंबर-17 : एक रेडक्रॉस शो के दौरान त्रुटिपूर्ण विद्युत वायरिंग के कारण प
1919 : परिसर में नए सिरे से क्रिकेट शुरू किया गया
1919 : थॉमसन कॉलेज इंजीनियर्स एसोसिएशन भंग हो गया, थॉमसनियन प्रकाशन भी बंद कर दिए गए
6 जनवरी 19 : आकशीय विद्युत से औषधालय प्रभावित हुआ
1920-1929
1923 : विद्युत एवं यांत्रिक अभियांत्रिकी के पाठ्यक्रम बंद कर दिए गए
1927 : मंदी के दौर में रुड़की के लड़कों की नियुक्ति की गारंटी वाली योजना वापस ले ली गई
1930-1939
1930 : यूरोपियन छात्रों का भोजनालय बंद कर दिया गया
1931 : कॉलेज की पत्रिका लॉयन शुरू की गई
1935 : आईएमए से भारतीय कमीशंड अफसरों के पहले बैच ने अभियांत्रिकी शिक्षा के लिए कॉलेज में प्रवेश लिया
1935 : भारतीय छात्रों के लिए भोजनालय शुरू किया गया
1940-1949
1941 : रुड़की यूनिवर्सिटी एलुमिनाई एसोसिएशन स्थापित। पहले इसे ओल्ड बॉयज एसोसिएशन के नाम से जाना जाता था
1943 : शिल्पियों की एक इकाई बनाई गई जिसे टेक्निकल पायनियर फोर्स कहा जाता था
1943 : परिसर में सैन्य अभियांत्रिकी के एक विद्यापीठ ने कार्य करना शुरू किया
1946 : विद्युत एवं यांत्रिक अभियांत्रिकी के पाठ्यक्रम शुरू
1947 : सीएसआईआर द्वारा केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान की स्थापना
1947 : सैन्य विद्यापीठ को यहाँ से हटाकर पुणे ले जाया गया
1948 : प्रदेश विधानसभा द्वारा रुड़की विश्वविद्यालय अधिनियम पारित किया गया
1949 : थॉमसन कॉलेज का उच्चीकरण कर इसे विश्वविद्यालय बना दिया गया
25 नवंबर 49 : स्थापना के सौ वर्ष बाद विश्वविद्यालय का उद्घाटन
25 नवंबर 49 : पंडित पंत ने विश्वविद्यालय में ग्रंथालय के लिए एक नए भवन की आधारशिला रखी
1950-1959
28-मार्च-50 : डॉ. सी.ए. हार्ट ने विश्वविद्यालय के उप कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया
10-फरवरी-51 : सीबीआरआई के एक भवन का शिलान्यास हुआ
1-दिसंबर-52 : छात्र क्लब में संबद्ध किए जाने के लिए एक सभागार हेतु शिलान्यास किया गया
1-फरवरी-53 : श्री बिजावत प्रति उप कुलपति हुए
28-फरवरी-53 : डॉ. सीए हार्ट ने त्यागपत्र दे दिया
1953 : यूनिवर्सिटी स्टाफ एसोसिएशन तथा क्लब की शुरुआत हुई
1954 : श्री अजोध्या नाथ खोसला की नियुक्ति उप कुलपति के रूप में हुई
1955 : कॉलेज की पत्रिका नाम बदलकर एलुमिनाई जर्नल कर दिया गया
1-नवंबर-55 : श्री वीटी कृष्णामचारी द्वारा पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया गया
25-नवंबर-55 : पंडित जवाहर लाल नेहरू ने डब्ल्यूआरडीटीसी का उद्घाटन किया
1956 : आदर्श बाल निकेतन अस्तित्व में आया
1956 : छात्र सहायता ऋण कोष शुरू हुआ
1957-61 : श्री केएन कथपलिया प्रति कुलपति हुए
1957 : दो वर्ष के लिए तकनीकी सहायक पाठ्यक्रम चलाया गया
1957 : हॉबीज क्लब शुरू हुआ
1-फरवरी-57 : सत्र के मध्य में ही बी.आर्क. शुरू किया गया
जून 57 : दूरसंचार अभियांत्रिकी के लिए स्वीकृति मिली
25-नवंबर-58 : नेहरू को डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि से सम्मानित किय
1959 : शिक्षक शिक्षण कार्यक्रम चलता रहा
1959 : रूरल हाउसिंग विंग की स्थापना
मार्च-59 : एनसीसी भवन का शिलान्यास हुआ
अगस्त-59 : प्रायोगिक उत्पादन-सह-प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना हेतु विस्तृत योजना
25-नवंबर-59 : डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी उसी प्रकार सम्मानित
18-दिसंबर-59 : खोसला ने उप कुलपति का पद छोड़ दिया
1959 : एक छोटे से अस्पताल के लिए भवन बना
1960-1969
1960: एसआरटीईई ने काम करना शुरू कर दिया
1960 : बीई पाठ्यक्रमों की अवधि तीन से बढ़ाकर चार वर्ष कर दी गई, परिणामस्वरूप 1963 में कोई भी बैच उत्तीर्ण होकर नहीं निकल सका
15-अगस्त-60 : गणित, भौतिकी, रसायन, भूविज्ञान तथा भू-भौतिकी विज्ञान के लिए अलग-अलग विभागों का गठन
1961 : वास्तुशिल्प विभाग को एक पृथक भवन मिल गया
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई 20-मार्च-1961 : घनानंद पाण्डे ने उप कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया
1962 : एक खंड में भवन का एक हिस्सा भू-भौतिकी एवं भूविज्ञान के लिए और दूसरा भूकंप विभग के लिए पूरा हुआ
1962 : चीन द्वारा युद्ध थोप दिए जाने से बीई के पाठ्यक्रम विलंबित हो गए
1962 : वह बैच जिसे 1964 में पास होना था तेजी से पाठ्यक्रम पूरा कराकर पाँच माह पूर्व ही जनवरी में भेज दिया गया
1962 : जिस बैच को 1965 में पास होना था उसे नवंबर 1964 में पास कर दिया गया
1962 : रोजगार सूचना एवं मार्गदर्शन ब्यूरो की स्थापना
1962 : ई.एस. रीक्रिएशन का नाम बदलकर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स एसोसिएशन कर दिया गया
1962 : व्यायामशाला के लिए भवन बनकर तैयार हो गया
1963 : शताब्दी द्वार को नया रूप दिया गया
1963 : 1958 से ही चले आ रहे एमई के 9 पाठ्यक्रमों के साथ-साथ पाँच और नए एमई पाठ्यक्रम जुड़ गए
1963 : हिंदी में तकनीकी शब्दावली के विकास के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग ने एक इकाई स्थापित की, जो 1967 में यहाँ से हटा दी गई
1964 : मानविकी अनुभाग शुरू हुआ और 1973 में यह एक विभाग बन गया
1964 : मानविकी अनुभाग शुरू हुआ और 1973 में यह एक विभाग बन गया
मई-64 : दूरसंचार विभाग को विद्युत विभाग से अलग कर दिया गया और इसका नाम बदल कर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार कर दिया गया
16-जून-64 : डीपीटी का शिलान्यास किया गया
अक्टूबर-64 : विश्वविद्यालय में आईआईटी का वेतनमान लागू किया गया
1965 : हॉबीज क्लब में पेंटिंग एवं स्कल्प्चर अनुभाग जोड़ा गया
1966 : पहली बार प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम कंप्यूटरीकृत किए गए
1966 : उप कुलपति के रूप में श्री पाण्डे का कार्यकाल समाप्त
1966 : विकास नगर में शिक्षकों के लिए एक आवास बनाया गया
31-जनवरी-66 : टीचर्स’ विंग बंद कर दिया गया
26-जनवरी-66 : डॉ. जाकिर हुसेन ने एलबीएस का उद्घाटन किया, उन्हें डीएससी की मानद उपाधि से सम्मानित भी किया गया
18-नवंबर-67 : प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को डी.इंजी. की उपाधि से सम्मानित किया गया, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग के एस. ब्लॉक का उद्घाटन किया
1968 : परास्नातक पाठ्यक्रमों का विस्तार, कुल 21 हुए
2-अक्टूबर-68 : महिला कार्य केंद्र की स्थापना। बाद में इसका नाम बदलकर महिला कार्य एवं कल्याण केंद्र कर दिया गया
1969 : स्नातक पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश के लिए 25% सीटों का आरक्षण कर दिया गया
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई
1970-1979
1970 : हॉबीज क्लब में हॉर्टिकल्चर ऐंड गार्डेनिंग अनुभाग जोड़ा गया
1970 : बैडमिंटन कोर्ट पूरा हो गया
1970 : अलकनंदा क्लब खुल गया, लेकिन इसका नामकरण 1979 में हुआ
1970 : डी क्लास 1 मार्च से हड़ताल पर चला गया
1971 : औद्योगिक शाखा के पहले बैच का प्रवेश
1971 : श्री चोपड़ा पाँच वर्ष का कार्यकाल समाप्त हुआ
1971 : विश्वविद्यालय में क्यूआईपी की स्थापना
1971 : उप कुलपति के रूप में सितंबर में डॉ. जय कृष्ण की नियुक्ति
1972 : एनएसएस की शुरुआत
1973 : यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग का नाम बदलकर यांत्रिक एवं औद्योगिक अभियांत्रिकी विभाग कर दिया गया
1974 : मंगल राम स्मारक ओपन बिलियर्ड्स चैंपियनशिप शुरू हुआ
1974 : स्त्री (एसटीआरईई) को अप्रैल में विश्वविद्यालय के नियमित विभागों में से एक के रूप में जोड़ लिया गया
1974 : रूसा (आरयूएसए) का संविधान पारित किया गया और यह अक्टूबर में लागू भी हो गया
1975 : ई ऐंड सी टावर पूरा हो गया और उप कुलपति श्री रेड्डी द्वारा 26 नवंबर को इसका उद्घाटन किया गया
1975 : डाक-टिकट तथा मुद्रा संकलन अनुभाग को हॉबीज क्लब में जोड़ा गया
1976 : सभी प्रवेश परीक्षा के माध्यम से करने का परंपरागत तरीका फिर से अपना लिया गया
1977 : डॉ. जगदीश नारायण ने नए उप कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया
1977 : रूसा चुनाव के दौरान विद्यार्थियों के दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष
1977: गैर शिक्षण स्टाफ में एक हड़ताल में हो सकता है
1978 : विश्वविद्यालय ने डीपीटी (सहारनपुर) को अपने अभिन्न अंग के रूप में स्वयं से जोड़कर एक नया इतिहास कायम किया
1978 : कॉलेज पत्रिका का नाम फिर से बदलकर लॉयन कर दिया गया
1978 : हॉबीज क्लब में स्टारगेजिंग अनुभाग जोड़ा गया
1979 : रुड़की विश्वविद्यालय के परिसर में एनआईएच की स्थापना
1979 : रुड़की यूनिवर्सिटी रीजनल कंप्यूटर सेंटर ने नवंबर में कार्य करना शुरू कर दिया
1980-1989
1980: छात्रों को 4 वें वर्ष के छात्र की आत्
1981 : इंडो-जर्मन टेक्निकल कोआपरेशन प्रोग्राम के अंतर्गत वेल्डिंग रिसर्च प्रयोग स्थापित
1982 : सेंटर फॉर माइक्रोप्रॉसेसर एप्लीकेशन अस्तित्व में आया
1982 : एएचईसी की स्थापना
1982 : तंजानिया के राष्ट्रपति श्री जूलियस नेयरेरे और उनकी पत्नी 2 अप्रैल को परिसर में आए
1983 : एमई पाठ्यक्रम की अवधि दो साल से घटा कर डेढ़ वर्ष कर दी गई
1983 : कंप्यूटर विज्ञान और प्रौद्योगिकी में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया गया
1984 : एवीआरसी की स्थापना
1985 : सात अन्य केंद्र जोड़े गए
1986 : यूएसआईसी (यूनिवर्सिटी साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर – विश्वविद्यालय विज्ञान यंत्रीकरण केंद्र) को एक यंत्रीकरण केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त हुई
1986 : जैवविज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग
1987 : इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर (ई ऐंड सी) विभाग का नाम बदलकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर अभियांत्रिकी (ईसी ऐंड ई) कर दिया गया
1987 : स्टेप रुड़की का एक सोसायटी के रूप में पंजीकरण हुआ
1989 : तीन अन्य केंद्रों की स्थापना
1990-1999
9-जनवरी-90 : बधिरों के लिए रुड़की विद्यालय (रुड़की स्कूल फॉर द डेफ) के संविधान को सिंडिकेट की स्वीकृति
1992 : राजेंद्र भवन का निर्माण पूरा
1994 : हैंगर के पास एक सामुदायिक भवन बना
1996 : इसकी सूची में पंद्रह अन्य केंद्र जुड़े
1996 : इन्फॉर्मेशन सुपरहाइवे सेंटर (आईएससी) की स्थापना
1998 : प्रबंधन अध्ययन विभाग का आरंभ
2000 - चल रहा
21 सितंबर 2001 : नई शताब्दी के आरंभ में ही, संसद के अधिनियम के अधीन रुड़की विश्वविद्यालय को एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी — भा.प्रौ.सं.) में बदल दिया गया। रुड़की विश्वविद्यालय के अंतिम कुलपति डॉ. डी.वी. सिंह ने नए निदेशक की नियुक्ति तक के समय के लिए प्रथम निदेशक के रूप में कार्यभार सँभाला।
दिसंबर 2001 : डॉ. प्रेमव्रत ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (भा.प्रौ.सं.रु.) के निदेशक का कार्यभार ग्रहण किया
2005: बहुसंख्यक फ्लैटों का निर्माण (अब पहाड़ी दृश्य अपार्टमेंट) पूरा हो गया था
2005 : तीन उत्कृष्टता केंद्रों — नामतः नैनो प्रौद्योगिकी, आपदा अल्पीकरण एवं परिवहन प्रणाली (सीट्रांस — CTRANS) की स्थापना; संस्थान में आयोजित 41वें इंटर आईआईटी स्पोर्ट्स मीट के लिए खेल सुविधाएँ बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाई गईं
2006 : एनसी निगम गेस्ट हाउस पूरा हो गया
2006 : डॉ. एस.सी. सक्सेना ने नए निदेशक के रूप में 1 जून 2006 को कार्यभार ग्रहण किया
2007 : महात्मा गांधी केंद्रीय ग्रंथालय की स्थापना हुई
2009 : आईआईटी रुड़की को हिमाचल प्रदेश स्थित आईआईटी मंडी के लिए मार्गदर्शक के रूप में नामित किया गया और आईआईटीएम के लिए रुड़की में कक्षाएँ शुरू कर दी गईं
2011 : आईआईटीआर का ग्रेटर नोएडा परिसर शुरू किया गया