1960-1969
1960: एसआरटीईई ने काम करना शुरू कर दिया
1960 : बीई पाठ्यक्रमों की अवधि तीन से बढ़ाकर चार वर्ष कर दी गई, परिणामस्वरूप 1963 में कोई भी बैच उत्तीर्ण होकर नहीं निकल सका
15-अगस्त-60 : गणित, भौतिकी, रसायन, भूविज्ञान तथा भू-भौतिकी विज्ञान के लिए अलग-अलग विभागों का गठन
1961 : वास्तुशिल्प विभाग को एक पृथक भवन मिल गया
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई 20-मार्च-1961 : घनानंद पाण्डे ने उप कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया
1962 : एक खंड में भवन का एक हिस्सा भू-भौतिकी एवं भूविज्ञान के लिए और दूसरा भूकंप विभग के लिए पूरा हुआ
1962 : चीन द्वारा युद्ध थोप दिए जाने से बीई के पाठ्यक्रम विलंबित हो गए
1962 : वह बैच जिसे 1964 में पास होना था तेजी से पाठ्यक्रम पूरा कराकर पाँच माह पूर्व ही जनवरी में भेज दिया गया
1962 : जिस बैच को 1965 में पास होना था उसे नवंबर 1964 में पास कर दिया गया
1962 : रोजगार सूचना एवं मार्गदर्शन ब्यूरो की स्थापना
1962 : ई.एस. रीक्रिएशन का नाम बदलकर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स एसोसिएशन कर दिया गया
1962 : व्यायामशाला के लिए भवन बनकर तैयार हो गया
1963 : शताब्दी द्वार को नया रूप दिया गया
1963 : 1958 से ही चले आ रहे एमई के 9 पाठ्यक्रमों के साथ-साथ पाँच और नए एमई पाठ्यक्रम जुड़ गए
1963 : हिंदी में तकनीकी शब्दावली के विकास के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग ने एक इकाई स्थापित की, जो 1967 में यहाँ से हटा दी गई
1964 : मानविकी अनुभाग शुरू हुआ और 1973 में यह एक विभाग बन गया
1964 : मानविकी अनुभाग शुरू हुआ और 1973 में यह एक विभाग बन गया
मई-64 : दूरसंचार विभाग को विद्युत विभाग से अलग कर दिया गया और इसका नाम बदल कर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार कर दिया गया
16-जून-64 : डीपीटी का शिलान्यास किया गया
अक्टूबर-64 : विश्वविद्यालय में आईआईटी का वेतनमान लागू किया गया
1965 : हॉबीज क्लब में पेंटिंग एवं स्कल्प्चर अनुभाग जोड़ा गया
1966 : पहली बार प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम कंप्यूटरीकृत किए गए
1966 : उप कुलपति के रूप में श्री पाण्डे का कार्यकाल समाप्त
1966 : विकास नगर में शिक्षकों के लिए एक आवास बनाया गया
31-जनवरी-66 : टीचर्स’ विंग बंद कर दिया गया
26-जनवरी-66 : डॉ. जाकिर हुसेन ने एलबीएस का उद्घाटन किया, उन्हें डीएससी की मानद उपाधि से सम्मानित भी किया गया
18-नवंबर-67 : प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को डी.इंजी. की उपाधि से सम्मानित किया गया, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग के एस. ब्लॉक का उद्घाटन किया
1968 : परास्नातक पाठ्यक्रमों का विस्तार, कुल 21 हुए
2-अक्टूबर-68 : महिला कार्य केंद्र की स्थापना। बाद में इसका नाम बदलकर महिला कार्य एवं कल्याण केंद्र कर दिया गया
1969 : स्नातक पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश के लिए 25% सीटों का आरक्षण कर दिया गया
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई
1961 : डॉक्टरेट की पहली उपाधि प्रदान की गई